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“Tremendous injustice”: Sanjay Manjrekar fumes over Auqib Nabi’s snub despite st – संजय मांजरेकर भड़के: आकिब नबी को टीम इंडिया में न चुनने को बताया ‘बड़ा अन्याय’

Shakil Hossain · · 1 min read

संजय मांजरेकर का फूटा गुस्सा: रणजी ट्रॉफी के स्टार आकिब नबी की अनदेखी पर चयनकर्ताओं को घेरा

भारतीय क्रिकेट में घरेलू टूर्नामेंट, विशेष रूप से रणजी ट्रॉफी, को हमेशा से ही राष्ट्रीय टीम में प्रवेश का सबसे बड़ा और विश्वसनीय माध्यम माना गया है। हालांकि, हाल ही में अफगानिस्तान के खिलाफ घोषित की गई एकमात्र टेस्ट टीम में जम्मू-कश्मीर के तेज गेंदबाज आकिब नबी (Auqib Nabi) को न चुने जाने के फैसले ने इस धारणा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारत के पूर्व दिग्गज बल्लेबाज और प्रसिद्ध कमेंटेटर संजय मांजरेकर ने इस चयन प्रक्रिया पर कड़ी आपत्ति जताई है और इसे आकिब नबी के साथ-साथ रणजी ट्रॉफी के अस्तित्व का भी “बड़ा अपमान” बताया है।

आकिब नबी का घरेलू क्रिकेट में धमाकेदार प्रदर्शन

आकिब नबी ने पिछले दो रणजी ट्रॉफी सीजन में जो प्रदर्शन किया है, वह किसी भी तेज गेंदबाज के लिए एक सपना जैसा हो सकता है। उनके आंकड़े उनकी मेहनत और काबिलियत की गवाही खुद देते हैं:

  • कुल विकेट (पिछले दो सीजन): 18 मैचों में 13.14 की अविश्वसनीय औसत के साथ कुल 104 विकेट लिए हैं।
  • हालिया सीजन (रणजी ट्रॉफी): 10 मैचों में केवल 12.56 की औसत से 60 विकेट झटके। इस दौरान उन्होंने 7 बार पारी में पांच विकेट लेने का कारनामा किया।
  • विजेता अभियान: नबी के इस असाधारण प्रदर्शन की बदौलत जम्मू-कश्मीर ने इतिहास में पहली बार रणजी ट्रॉफी का खिताब अपने नाम किया।
  • पिछला सीजन: जम्मू-कश्मीर को क्वार्टर फाइनल तक पहुंचाने में नबी का अहम योगदान था, जहां उन्होंने 8 मैचों में 13.93 की औसत से 44 विकेट चटकाए थे।
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इतने उत्कृष्ट आंकड़ों के बावजूद, आकिब नबी को न केवल मुख्य टेस्ट टीम से बाहर रखा गया, बल्कि उन्हें इंडिया-ए (India A) की टीमों में भी जगह नहीं मिल सकी है, जो कि किसी भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।

“यह पूरी तरह से हास्यास्पद है” – संजय मांजरेकर की तीखी प्रतिक्रिया

स्पोर्टस्टार के प्रसिद्ध ‘इनसाइट एज’ पोडकास्ट पर बातचीत करते हुए, संजय मांजरेकर ने चयनकर्ताओं के इस फैसले पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने इस गैर-चयन को पूरी तरह से समझ से परे बताया। मांजरेकर ने कहा, “मुझे पुराने दिन याद आते हैं जब इस तरह के भारी अन्याय होने पर लोग तख्तियां लेकर सड़कों पर उतर आते थे और विरोध प्रदर्शन करते थे। आज के समय में यह आक्रोश ज्यादातर सोशल मीडिया तक ही सीमित रह गया है, लेकिन आकिब नबी का न चुना जाना एक ऐसा फैसला है जिसे मैं किसी भी तरह से नहीं समझ पा रहा हूं।”

उन्होंने आगे चयनकर्ताओं की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा, “यह वास्तव में हास्यास्पद है। जब मोहम्मद शमी और मोहम्मद सिराज जैसे प्रमुख गेंदबाज टीम में नहीं खेल रहे हैं (चाहे उन्हें आराम दिया गया हो या दीर्घकालिक योजना के तहत बाहर रखा गया हो), तब भी अगर आप इस तरह के प्रदर्शन की अनदेखी करने जा रहे हैं, तो फिर रणजी ट्रॉफी आयोजित करने का कोई मतलब ही नहीं रह जाता है।”

क्या आईपीएल 2026 का प्रदर्शन बना राह का रोड़ा?

खेल विश्लेषकों और प्रशंसकों के बीच यह चर्चा जोरों पर है कि क्या आकिब नबी के टेस्ट टीम में न चुने जाने के पीछे उनका हालिया आईपीएल प्रदर्शन है? आईपीएल 2026 में दिल्ली कैपिटल्स (Delhi Capitals) के लिए खेलते हुए आकिब नबी का प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा था, जहां उन्होंने 5 मैचों में एक भी विकेट नहीं लिया और 11 रन प्रति ओवर से अधिक की महंगी इकॉनमी से रन लुटाए। लेकिन यहाँ बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या केवल 5 टी20 मैचों के खराब प्रदर्शन के आधार पर किसी खिलाड़ी के दो साल के शानदार प्रथम श्रेणी (रेड-बॉल) प्रदर्शन को पूरी तरह से खारिज कर दिया जाना चाहिए? टेस्ट क्रिकेट और टी20 क्रिकेट के प्रारूप और मांग पूरी तरह से अलग हैं, और मांजरेकर के अनुसार, टेस्ट टीम के चयन के लिए रणजी ट्रॉफी के प्रदर्शन को ही सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

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भारतीय टेस्ट टीम में अन्य बड़े बदलाव और नए चेहरे

बीसीसीआई द्वारा घोषित की गई टीम में आकिब नबी की अनदेखी के अलावा भी कई बड़े फैसले लिए गए हैं। इस टीम में उप-कप्तानी की जिम्मेदारी में बदलाव किया गया है। विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत को उप-कप्तान की भूमिका से मुक्त कर दिया गया है और उनकी जगह अनुभवी केएल राहुल को टीम का नया उप-कप्तान बनाया गया है। इसके अलावा, टीम प्रबंधन ने कार्यभार प्रबंधन (Workload Management) और चोट की चिंताओं को ध्यान में रखते हुए स्टार ऑलराउंडर रवींद्र जडेजा और अनुभवी तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी को इस टेस्ट मैच से आराम दिया है। इन वरिष्ठ खिलाड़ियों की अनुपस्थिति में कुछ नए चेहरों को भारतीय टीम में शामिल होने का सुनहरा मौका मिला है, जिनमें बाएं हाथ के स्पिनर मानव सुथार और हर्ष दुबे शामिल हैं, जिन्हें पहली बार राष्ट्रीय टीम का बुलावा मिला है, साथ ही तेज गेंदबाज गुरनूर ब्रार को भी टीम में शामिल किया गया है।

मुल्लांपुर स्टेडियम में खेला जाएगा ऐतिहासिक मुकाबला

भारत और अफगानिस्तान के बीच यह एकमात्र टेस्ट मैच 6 जून से न्यू चंडीगढ़ के मुल्लांपुर स्थित ‘महाराजा यादविंद्र सिंह इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम’ में खेला जाएगा। यह मैदान खेल प्रेमियों के लिए एक नया अनुभव होगा क्योंकि इस खूबसूरत स्टेडियम में यह केवल दूसरा पुरुष अंतर्राष्ट्रीय मुकाबला होगा। इससे पहले, इस मैदान ने दिसंबर 2025 में भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक रोमांचक टी20 अंतर्राष्ट्रीय मैच की मेजबानी की थी। इसके अलावा, उसी वर्ष सितंबर 2025 में भारत और ऑस्ट्रेलिया की महिला टीमों के बीच दो वनडे मैच भी यहां आयोजित किए गए थे।

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निष्कर्ष: घरेलू क्रिकेट की साख पर सवाल

संजय मांजरेकर द्वारा उठाया गया यह मुद्दा केवल एक खिलाड़ी के चयन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी भारतीय घरेलू क्रिकेट प्रणाली की साख और महत्व पर सवाल खड़ा करता है। यदि रणजी ट्रॉफी में लगातार असाधारण प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को राष्ट्रीय टीम या इंडिया-ए टीमों में मौका नहीं मिलेगा, तो युवा खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होगा, जो भविष्य में भारतीय टेस्ट क्रिकेट के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

Written by Shakil Hossain

Shakil Hossain is a senior cricket correspondent for the Dhaka Tribune, renowned for his deeply informed coverage of the Bangladesh national team and the country’s rapidly evolving domestic cricket ecosystem. A double graduate of the University of Dhaka, he began his career covering the Dhaka Premier League from the press boxes of Mirpur and Fatullah, building an encyclopedic knowledge of the players, pitches, and politics that shape Bangladeshi cricket. Shakil is especially valued for his ability to decode spin bowling tactics and the influence of slow, turning tracks on match outcomes. He has reported from multiple World Cups, every edition of the Bangladesh Premier League, and numerous bilateral series at home and abroad. A BSPA Award winner, Shakil’s hallmark is the long-form profile—human, unsentimental, and precise—that brings the stories of emerging talents and seasoned campaigners alike to a hungry cricketing public.