क्या ऋषभ पंत और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच सब कुछ ठीक है? पर्दे के पीछे की हताशा का सच
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आईपीएल 2026: क्या ऋषभ पंत और एलएसजी के बीच बढ़ रही है खाई?
आईपीएल 2026 में लखनऊ सुपर जायंट्स (LSG) का अभियान एक ऐसे मोड़ पर है, जहाँ खेल के परिणामों से अधिक चर्चा टीम के भीतर की परिस्थितियों की हो रही है। टीम के कप्तान ऋषभ पंत का हालिया व्यवहार और उनके बयान इस बात का संकेत दे रहे हैं कि संजीव गोयनका के मालिकाना हक वाली इस फ्रेंचाइजी में सब कुछ सामान्य नहीं है।
मैदान पर दिख रही हताशा
लखनऊ सुपर जायंट्स के लिए यह सीजन बेहद कठिन रहा है। कागज पर एक मजबूत टीम होने के बावजूद, टीम लगातार लड़खड़ाती नजर आई है। 13 मैचों में से नौ हार के बाद अंक तालिका में सबसे नीचे खिसक चुकी एलएसजी की रणनीति और टीम संयोजन पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। लेकिन असली मुद्दा तब सामने आया जब राजस्थान रॉयल्स के खिलाफ मैच के बाद ऋषभ पंत ने लाइव टीवी पर अपना आपा खो दिया।
जयपुर के सवाई मानसिंह स्टेडियम में 220 रनों के विशाल स्कोर का बचाव न कर पाने के बाद, पंत ने इयान बिशप के साथ बातचीत के दौरान एक आपत्तिजनक शब्द (एफ-बॉम्ब) का इस्तेमाल किया। हालांकि इयान बिशप ने तुरंत माफी मांगी, लेकिन पंत का यह भावुक और हताश भरा लहजा यह बताने के लिए काफी था कि टीम के लगातार खराब प्रदर्शन से वे मानसिक रूप से कितने थक चुके हैं।
‘बहुत अधिक दिमाग’ और रणनीतिक भ्रम
पंत की हताशा केवल एक मैच तक सीमित नहीं है। पूरे सीजन के दौरान उन्होंने बार-बार यह संकेत दिया है कि टीम मैनेजमेंट में ‘बहुत ज्यादा लोग’ शामिल हैं, जो निर्णय लेने की प्रक्रिया को जटिल बना रहे हैं। एलएसजी के सपोर्ट स्टाफ में टॉम मूडी, जस्टिन लैंगर, केन विलियमसन और भारत अरुण जैसे बड़े नाम शामिल हैं। पंत का मानना है कि इतने अधिक सलाहकारों के कारण मैदान पर सही निर्णय लेना मुश्किल हो रहा है।
कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ एक करीबी हार के बाद पंत ने स्पष्ट रूप से कहा था, “मैदान पर बहुत ज्यादा दिमाग होने से चीजें आसान नहीं होतीं।” यह टिप्पणी स्पष्ट करती है कि उन्हें अपनी रणनीति को लागू करने में भारी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
थैंक टैंक बनाम कप्तान
चेन्नई सुपर किंग्स के खिलाफ मैच के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पंत ने बल्लेबाजी क्रम में खुद को ऊपर न भेजकर अन्य खिलाड़ियों को मौका देने का निर्णय ‘थिंक टैंक’ के दबाव में लिया। बाद में उन्होंने स्वीकार किया कि हर बार उनकी अपनी सोच को टीम मैनेजमेंट के निर्देशों के कारण लागू नहीं किया जा सका।
जब एक कप्तान बार-बार यह कहता है कि उसे अपने विचारों को लागू करने की आजादी नहीं मिल रही है, तो यह स्पष्ट है कि ड्रेसिंग रूम के भीतर तालमेल की कमी है। संजीव गोयनका के साथ मैदान पर उनकी गरमा-गरम बहसें भी इस बात का प्रमाण हैं कि मालिक और कप्तान के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है।
निष्कर्ष: एक बड़ा संकट
ऋषभ पंत, जो अपने स्वभाव से बेहद भावुक और जुझारू खिलाड़ी माने जाते हैं, आज एक हताश और ऊर्जाहीन कप्तान के रूप में दिखाई दे रहे हैं। उनके बयानों, बॉडी लैंग्वेज और टीम के असंगत प्रदर्शन ने यह साबित कर दिया है कि एलएसजी के भीतर की समस्याएं काफी गहरी हैं। अगर फ्रेंचाइजी ने समय रहते इन मुद्दों को नहीं सुलझाया, तो यह न केवल इस सीजन के लिए, बल्कि टीम के भविष्य के लिए भी एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। क्या ऋषभ पंत अगले सीजन में भी इस सेटअप के साथ सहज होंगे? यह सवाल फिलहाल क्रिकेट जगत में सबसे बड़ा बना हुआ है।