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रविंद्र जडेजा का CSK छोड़ना: क्या कप्तानी की महत्वाकांक्षा बनी मुख्य कारण?

Priya Sharma · · 1 min read

रविंद्र जडेजा के CSK छोड़ने के पीछे का सच

आईपीएल (IPL) की दुनिया में खिलाड़ी अक्सर अपनी टीम बदलते हैं, लेकिन रविंद्र जडेजा का चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) से राजस्थान रॉयल्स (RR) में जाना किसी बड़े झटके से कम नहीं था। 12 साल तक चेन्नई की पीली जर्सी का अभिन्न हिस्सा रहने वाले और 2023 के फाइनल में अपनी जादुई बल्लेबाजी से टीम को खिताब जिताने वाले जडेजा का यूं अचानक टीम छोड़ना फैंस के लिए हैरानी भरा था। हाल ही में सामने आई एक रिपोर्ट ने इस स्थानांतरण के पीछे छिपी कप्तानी की महत्वाकांक्षाओं और टीम के अंदरूनी समीकरणों पर से पर्दा उठाया है।

राजस्थान रॉयल्स में वापसी और कप्तानी का एंगल

आईपीएल 2026 की शुरुआत से ठीक पहले एक बड़ी ट्रेड डील हुई, जिसमें सीएसके और आरआर के बीच खिलाड़ियों का अदला-बदली हुआ। संजू सैमसन, जो लंबे समय से राजस्थान रॉयल्स की कप्तानी संभाल रहे थे, का बाहर निकलना एक बड़ा बदलाव था। रिपोर्टों के मुताबिक, जडेजा का आरआर में जाना केवल एक सामान्य ट्रेड नहीं था, बल्कि इसके पीछे एक गहरी योजना थी। सूत्रों का दावा है कि जडेजा ने अपने करीबियों से राजस्थान रॉयल्स का कप्तान बनने की इच्छा जाहिर की थी। जब सीएसके प्रबंधन को इस बात की भनक लगी, तो उन्होंने उन्हें जाने देने का फैसला किया।

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रियान पराग और कप्तानी की चुनौती

राजस्थान रॉयल्स के लिए पिछला सीजन काफी कठिन रहा था। संजू सैमसन की चोट के कारण रियान पराग को कमान संभालनी पड़ी, लेकिन टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा और वे अंक तालिका में नौवें स्थान पर रहे। सैमसन के जाने के बाद, आरआर का प्रबंधन नए कप्तान की तलाश में था। यशस्वनी जायसवाल से लेकर रविंद्र जडेजा तक, कई नामों पर चर्चा हुई, लेकिन अंततः जिम्मेदारी रियान पराग को दी गई। जडेजा की यह महत्वाकांक्षा, सीएसके के लिए एक असहज स्थिति पैदा करने वाली थी।

एमएस धोनी और ट्रेड पर सवाल

इस पूरे मामले का एक और दिलचस्प पहलू एमएस धोनी की प्रतिक्रिया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस ट्रेड से धोनी खुश नहीं थे। भले ही धोनी अब आधिकारिक तौर पर कप्तान नहीं हैं, लेकिन टीम के फैसलों में उनकी राय आज भी सर्वोपरि होती है। कहा जा रहा है कि जडेजा के इस ट्रेड के बारे में उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई थी, जो यह दर्शाता है कि सीएसके के भीतर सब कुछ सामान्य नहीं था।

जडेजा का पिछला कप्तानी रिकॉर्ड

रविंद्र जडेजा की कप्तानी की आकांक्षा पर क्रिकेट के जानकारों ने सवाल भी खड़े किए हैं। साल 2022 में, जब एमएस धोनी ने कप्तानी छोड़ी थी, तो जडेजा को यह जिम्मेदारी सौंपी गई थी। हालांकि, परिणाम उम्मीद के मुताबिक नहीं रहे। सीएसके ने उस सीजन में जडेजा की कप्तानी में शुरुआती आठ मैचों में से केवल दो में जीत हासिल की थी, जिसके बाद उन्हें बीच सीजन में ही कप्तानी से हटना पड़ा। उसके बाद धोनी ने वापसी की, लेकिन टीम उस सीजन में संघर्ष करती दिखी। 2023 में धोनी की कप्तानी में जडेजा ने एक खिलाड़ी के रूप में शानदार प्रदर्शन करते हुए टीम को पांचवां खिताब जिताया।

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निष्कर्ष

भले ही जडेजा आज राजस्थान रॉयल्स का हिस्सा हैं, लेकिन सीएसके के साथ उनका रिश्ता हमेशा याद रखा जाएगा। ‘रॉकस्टार’ के रूप में अपनी पहचान बनाने वाले जडेजा का 2008 में राजस्थान से ही सफर शुरू हुआ था। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या वे आने वाले समय में अपने कप्तानी के सपने को पूरा कर पाते हैं या नहीं। आंकड़ों की बात करें तो, मौजूदा टूर्नामेंट में उन्होंने 11 मैचों में 8 विकेट लिए हैं और वे आज भी अपनी किफायती गेंदबाजी के लिए जाने जाते हैं। यह बदलाव उनके करियर को किस मोड़ पर ले जाएगा, यह तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन यह साफ है कि आईपीएल के मंच पर खिलाड़ी की महत्वकांक्षाएं कई बार बड़े बदलावों का कारण बनती हैं।

Written by Priya Sharma

Priya Sharma is a senior cricket correspondent for The Indian Express, and one of the most respected voices covering women’s cricket in India. A graduate of Miranda House, she started her career in a newsroom dominated by men’s sport and deliberately chose to put women’s cricket at the centre of her reporting. Priya has chronicled the Indian women’s team through World Cups, the transformational arrival of the Women’s Premier League, and the quiet, determined rise of girls’ cricket in small towns and villages. Her long‑form profiles of cricketers like Smriti Mandhana, Jemimah Rodrigues, and Renuka Singh are known for their depth and sensitivity. Beyond match reports, Priya writes regularly on media representation and the structural barriers women face in sports journalism. A recipient of the Ramnath Goenka Award and the Laadli Media Award, she believes that telling the full story of women’s cricket is not just a beat, but a responsibility.