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जो रूट का सचिन तेंदुलकर के रिकॉर्ड पर बड़ा बयान: क्या टूट पाएगा महानतम रिकॉर्ड?

Priya Sharma · · 1 min read

जो रूट और सचिन तेंदुलकर का महान रिकॉर्ड

क्रिकेट की दुनिया में टेस्ट फॉर्मेट सबसे कठिन परीक्षा माना जाता है। इस कठिन फॉर्मेट में जो रूट ने पिछले कुछ वर्षों में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है। वर्तमान में जो रूट टेस्ट क्रिकेट इतिहास के दूसरे सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज हैं और अब सबकी नजरें महान सचिन तेंदुलकर के उस रिकॉर्ड पर टिकी हैं, जिसे कभी ‘अभेद्य’ माना जाता था। हालांकि, इतने करीब पहुंचने के बावजूद जो रूट की प्रतिक्रिया बेहद विनम्र और प्रेरणादायक है।

सचिन तेंदुलकर का अतुलनीय योगदान

हाल ही में ‘द एथलेटिक’ के साथ एक साक्षात्कार में, जो रूट ने सचिन तेंदुलकर की लंबी उम्र और उनकी खेल के प्रति निरंतरता की जमकर तारीफ की। रूट ने इस बात को स्वीकार किया कि जब भी वह मैदान पर उतरते हैं या मीडिया के सामने होते हैं, तो उनसे एक ही सवाल बार-बार पूछा जाता है—क्या आप सचिन के रिकॉर्ड को तोड़ पाएंगे? इस पर रूट का कहना है, ‘मुझसे यह सवाल इतनी बार पूछा जाता है कि अब मैं इसे नजरअंदाज नहीं कर सकता, भले ही मैं कोशिश करूं।’

दो पीढ़ियों का संगम

रूट ने याद किया कि किस तरह सचिन तेंदुलकर का करियर कितना लंबा रहा है। रूट ने भावुक होकर कहा, ‘सचिन ने मेरे जन्म से पहले टेस्ट क्रिकेट में पदार्पण किया था और सबसे अद्भुत बात यह है कि उन्होंने मेरे अपने टेस्ट डेब्यू मैच में भी खेला था। उनका करियर और उनकी लंबी उम्र वास्तव में अविश्वसनीय है। केवल टेस्ट क्रिकेट ही नहीं, बल्कि उनके 50 वनडे शतक भी यह बताते हैं कि वह कितने बड़े खिलाड़ी थे।’

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दबाव और तकनीक का संतुलन

सचिन तेंदुलकर का करियर 1989 से 2013 तक चला, जिसमें उन्होंने न केवल बेशुमार रन बनाए, बल्कि भारत जैसे बड़े देश में एक आइकन होने का अपार दबाव भी झेला। रूट ने कहा, ‘वह उस समय भारत के सबसे प्रसिद्ध व्यक्ति थे। वह वास्तव में एक बहुत गंभीर खिलाड़ी थे।’ रूट की खासियत यह है कि वह आधुनिक क्रिकेट की आक्रामक शैली के बावजूद अपनी तकनीकी शुद्धता और निरंतरता पर भरोसा रखते हैं।

रूट की बल्लेबाजी का दर्शन

अपनी फॉर्म और तकनीक के बारे में बात करते हुए रूट ने बताया कि वह लगातार खुद को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं। उन्होंने कहा, ‘मैं हमेशा सुधार की तलाश में रहता हूं। मैं अपनी बल्लेबाजी में नई चीजें जोड़ना चाहता हूं ताकि मैं तकनीकी रूप से मजबूत रहूं। जब मैं पिच पर होता हूं, तो मेरा ध्यान सिर्फ खेल को पढ़ने और परिस्थितियों के अनुसार खेलने पर होता है, न कि तकनीकी चिंताओं पर।’

रिकॉर्ड का सफर

वर्तमान में, जो रूट के टेस्ट करियर में 13,943 रन हो चुके हैं, जबकि सचिन तेंदुलकर 15,921 रनों के साथ शीर्ष पर बने हुए हैं। हालांकि रूट के लिए रिकॉर्ड से ज्यादा महत्वपूर्ण खेल का आनंद लेना और टीम की जीत में योगदान देना है। उनकी यह विनम्रता ही उन्हें इस पीढ़ी का सबसे महान खिलाड़ी बनाती है। चाहे रिकॉर्ड टूटे या न टूटे, जो रूट का नाम पहले ही विश्व क्रिकेट के महान बल्लेबाजों की सूची में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज हो चुका है।

क्रिकेट प्रेमी अब उत्सुक हैं कि क्या आने वाले वर्षों में जो रूट इस महान रिकॉर्ड की दूरी को पाट पाएंगे। जो कुछ भी हो, सचिन तेंदुलकर के प्रति उनका सम्मान यह दर्शाता है कि क्रिकेट की महानता केवल आंकड़ों में नहीं, बल्कि खेल के प्रति समर्पण और एक-दूसरे के प्रति सम्मान में भी निहित है।

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Written by Priya Sharma

Priya Sharma is a senior cricket correspondent for The Indian Express, and one of the most respected voices covering women’s cricket in India. A graduate of Miranda House, she started her career in a newsroom dominated by men’s sport and deliberately chose to put women’s cricket at the centre of her reporting. Priya has chronicled the Indian women’s team through World Cups, the transformational arrival of the Women’s Premier League, and the quiet, determined rise of girls’ cricket in small towns and villages. Her long‑form profiles of cricketers like Smriti Mandhana, Jemimah Rodrigues, and Renuka Singh are known for their depth and sensitivity. Beyond match reports, Priya writes regularly on media representation and the structural barriers women face in sports journalism. A recipient of the Ramnath Goenka Award and the Laadli Media Award, she believes that telling the full story of women’s cricket is not just a beat, but a responsibility.