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Joe Root: क्या जो रूट तोड़ पाएंगे सचिन तेंदुलकर का टेस्ट रिकॉर्ड?

Shakil Hossain · · 1 min read

टेस्ट क्रिकेट की दौड़: सचिन बनाम रूट

टेस्ट क्रिकेट को खेल का सबसे कठिन और शुद्धतम प्रारूप माना जाता है, और जब इस प्रारूप के ‘भगवान’ की बात आती है, तो भारत के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर का नाम सबसे ऊपर आता है। सचिन ने अपने शानदार करियर में 15,921 टेस्ट रन बनाए हैं, जो आज भी एक अटूट कीर्तिमान बना हुआ है। हालांकि, आधुनिक युग के दिग्गज बल्लेबाज जो रूट अब इस रिकॉर्ड के काफी करीब पहुंच चुके हैं।

वर्तमान में, जो रूट के नाम 13,943 टेस्ट रन दर्ज हैं। यह आंकड़े और भी प्रभावशाली हो जाते हैं जब हम देखते हैं कि रूट ने इसे केवल 298 पारियों में हासिल किया है, जबकि सचिन तेंदुलकर ने अपने करियर में 329 पारियां खेली थीं। यह अंतर दर्शाता है कि रूट किस असाधारण लय में बल्लेबाजी कर रहे हैं।

क्या जो रूट तोड़ पाएंगे तेंदुलकर का रिकॉर्ड?

35 वर्ष की आयु में, जो रूट अभी भी अपनी फिटनेस और फॉर्म के चरम पर हैं। चूंकि रूट अब मुख्य रूप से केवल टेस्ट क्रिकेट पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, इसलिए उन्हें लंबे प्रारूप में खुद को तरोताजा रखने में मदद मिलती है। जैसा कि हम जानते हैं, सचिन तेंदुलकर ने भी 40 वर्ष की आयु तक टेस्ट क्रिकेट खेला था, जिससे यह संकेत मिलता है कि रूट के पास इस ऐतिहासिक मुकाम तक पहुंचने के लिए पर्याप्त समय है।

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हाल ही में ‘द एथलेटिक’ के साथ बातचीत के दौरान, रूट ने सचिन के प्रति अपना गहरा सम्मान व्यक्त किया। उन्होंने कहा, ‘सचिन ने जो हासिल किया, वह वास्तव में अद्भुत है। यदि मैं कहूं कि उनके साथ एक ही चर्चा में शामिल होना भी मेरे लिए बड़ी बात है, तो आप मुझ पर विश्वास करें। उन्होंने मेरे जन्म से पहले अपना टेस्ट डेब्यू किया था और मेरे डेब्यू मैच में भी वे खेल रहे थे। उनकी निरंतरता लाजवाब है।’

बल्लेबाजी में निरंतरता और मानसिक स्पष्टता

जो रूट न केवल टेस्ट में बल्कि सफेद गेंद के क्रिकेट में भी अपनी छाप छोड़ने में सफल रहे हैं। 2019 विश्व कप में इंग्लैंड की खिताबी जीत में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण रही थी। रूट का मानना है कि आधुनिक क्रिकेट की मांग के अनुसार खुद को ढालना उनकी सफलता का राज है।

अपनी तकनीक और मानसिक दृष्टिकोण पर बात करते हुए रूट ने कहा, ‘मैं हमेशा विकसित होने और अपनी बल्लेबाजी में नई चीजें जोड़ने की कोशिश करता हूं। मैं यह सुनिश्चित करता हूं कि क्रीज पर जाने से पहले मेरी तकनीक दुरुस्त रहे, ताकि मैच के दौरान मुझे तकनीकी बारीकियों के बजाय केवल खेल पर ध्यान केंद्रित करने में मदद मिले। यह सरल लगता है, लेकिन क्रीज पर उतरकर केवल खेल का आनंद लेना ही मेरा लक्ष्य होता है।’

आगामी चुनौतियां और भविष्य का लक्ष्य

वर्तमान में, जो रूट सचिन तेंदुलकर के सर्वकालिक रिकॉर्ड से लगभग 2,000 रन पीछे हैं। मार्च 2027 तक इंग्लैंड की टीम कम से कम 10 टेस्ट मैच खेलेगी, जो रूट के लिए इस अंतर को पाटने का एक शानदार अवसर प्रदान करेगा। 2021 से रूट का फॉर्म अविश्वसनीय रहा है, जहां उन्होंने 6,000 से अधिक रन और 24 शतक जड़े हैं। कुल मिलाकर, रूट ने अब तक 41 टेस्ट शतक और 66 अर्धशतक जमाए हैं।

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रूट के लिए आगामी कार्यक्रम:

  • न्यूजीलैंड के खिलाफ तीन मैचों की टेस्ट सीरीज (लॉर्ड्स से शुरुआत)।
  • पाकिस्तान के खिलाफ तीन मैचों की घरेलू सीरीज।
  • दक्षिण अफ्रीका का दौरा (तीन टेस्ट मैच)।
  • मार्च 2027 में ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 150 साल का जश्न मनाने वाला विशेष टेस्ट मैच।

क्या जो रूट सचिन तेंदुलकर के 15,921 रनों के जादुई आंकड़े को पार कर पाएंगे? यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन जिस तरह से रूट अपनी बल्लेबाजी में निखार ला रहे हैं, उससे क्रिकेट प्रेमियों को एक ऐतिहासिक मुकाम देखने की उम्मीद जरूर है।

Written by Shakil Hossain

Shakil Hossain is a senior cricket correspondent for the Dhaka Tribune, renowned for his deeply informed coverage of the Bangladesh national team and the country’s rapidly evolving domestic cricket ecosystem. A double graduate of the University of Dhaka, he began his career covering the Dhaka Premier League from the press boxes of Mirpur and Fatullah, building an encyclopedic knowledge of the players, pitches, and politics that shape Bangladeshi cricket. Shakil is especially valued for his ability to decode spin bowling tactics and the influence of slow, turning tracks on match outcomes. He has reported from multiple World Cups, every edition of the Bangladesh Premier League, and numerous bilateral series at home and abroad. A BSPA Award winner, Shakil’s hallmark is the long-form profile—human, unsentimental, and precise—that brings the stories of emerging talents and seasoned campaigners alike to a hungry cricketing public.