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अफगानिस्तान सीरीज: भारतीय टीम में चयन पर उठे सवाल, क्या ये खिलाड़ी थे हकदार?

Priya Sharma · · 1 min read

अफगानिस्तान सीरीज के लिए टीम चयन पर उठते सवाल

हाल ही में बीसीसीआई ने अफगानिस्तान के खिलाफ होने वाली घरेलू सीरीज के लिए भारतीय टेस्ट और वनडे टीम की घोषणा की। आईपीएल के समापन के बाद शुरू होने वाली इस सीरीज में एक टेस्ट और तीन वनडे मैच खेले जाएंगे। अजीत अगरकर के नेतृत्व वाली चयन समिति द्वारा चुनी गई टीम में कई चौंकाने वाले नाम शामिल हैं, जिससे क्रिकेट गलियारों में चर्चाओं का दौर गर्म है। आलोचकों का मानना है कि प्रदर्शन के आधार पर कई खिलाड़ियों को नजरअंदाज किया गया, जबकि कुछ ऐसे खिलाड़ियों को ‘लाइफलाइन’ दी गई जिनका हालिया प्रदर्शन काफी निराशाजनक रहा है।

टेस्ट और वनडे स्क्वॉड का विश्लेषण

टीम में शुभमन गिल को कप्तानी सौंपी गई है, जबकि सीनियर खिलाड़ियों की वापसी और कुछ नए चेहरों को शामिल करने का मिश्रण देखने को मिला है। लेकिन सवाल यह है कि क्या चयन प्रक्रिया में पूरी तरह से योग्यता को प्राथमिकता दी गई है?

नितीश कुमार रेड्डी (टेस्ट टीम)

नितीश कुमार रेड्डी ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ शतक लगाकर अपने टेस्ट करियर की शुरुआत शानदार तरीके से की थी। तब उन्हें भारतीय टेस्ट टीम के भविष्य के सितारे के रूप में देखा जा रहा था। दुर्भाग्य से, उस शतक के बाद उनका प्रदर्शन लगातार नीचे गिरा है। बल्ले और गेंद दोनों से उनका योगदान औसत से भी कम रहा है। उनके घरेलू क्रिकेट के आंकड़े भी इस बात की गवाही देते हैं कि उन्हें टेस्ट टीम में बने रहने के लिए अभी और अधिक निरंतरता की आवश्यकता है। उन्हें टीम में बनाए रखना कई प्रशंसकों के लिए आश्चर्यजनक है।

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वॉशिंगटन सुंदर (वनडे टीम)

वॉशिंगटन सुंदर का वनडे टीम में चयन लंबे समय से बहस का मुद्दा बना हुआ है। टीम प्रबंधन ने बार-बार उन पर भरोसा जताया है और उन्हें केएल राहुल के बल्लेबाजी क्रम यानी नंबर 5 पर खिलाने की कोशिश की है। बावजूद इसके, 50 ओवर के फॉर्मेट में उनका प्रदर्शन उम्मीदों के अनुरूप नहीं रहा है। उनके आंकड़े बताते हैं कि वे उस स्तर पर मैच विजेता साबित नहीं हो पा रहे हैं, जिसकी अपेक्षा भारतीय टीम को होती है।

गुरनूर बराड़ और चयन की पहेली

सबसे अधिक हैरानी गुरनूर बराड़ के चयन पर हुई है। टेस्ट स्क्वॉड में उन्हें जगह देना और आकिब नबी जैसे प्रतिभाशाली खिलाड़ी को नजरअंदाज करना चयन समिति पर सवाल खड़े करता है। आकिब नबी ने जम्मू-कश्मीर को रणजी ट्रॉफी का खिताब दिलाने में अहम भूमिका निभाई थी और वे टूर्नामेंट के सबसे सफल विकेट लेने वाले गेंदबाजों में से एक थे। इसके विपरीत, गुरनूर बराड़ के प्रथम श्रेणी आंकड़े उतने प्रभावशाली नहीं हैं। यह चयन न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि योग्यता को लेकर भी गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

निष्कर्ष

भारतीय क्रिकेट में पारदर्शिता और योग्यता के आधार पर चयन हमेशा से अहम रहा है। अफगानिस्तान के खिलाफ यह सीरीज जहां टीम के लिए जीत की राह पर लौटने का अवसर है, वहीं चयन समिति को यह भी सोचना होगा कि क्या उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कड़ी मेहनत करने वाले खिलाड़ियों को नजरअंदाज करके टीम का मनोबल तो नहीं गिराया? आने वाले मैचों में प्रदर्शन ही तय करेगा कि इन खिलाड़ियों का चयन सही था या फिर यह महज एक प्रायोगिक कदम साबित हुआ। प्रशंसकों को उम्मीद है कि टीम प्रबंधन भविष्य के फैसलों में और अधिक स्पष्टता लाएगा ताकि भारतीय क्रिकेट का भविष्य सुरक्षित रह सके।

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Written by Priya Sharma

Priya Sharma is a senior cricket correspondent for The Indian Express, and one of the most respected voices covering women’s cricket in India. A graduate of Miranda House, she started her career in a newsroom dominated by men’s sport and deliberately chose to put women’s cricket at the centre of her reporting. Priya has chronicled the Indian women’s team through World Cups, the transformational arrival of the Women’s Premier League, and the quiet, determined rise of girls’ cricket in small towns and villages. Her long‑form profiles of cricketers like Smriti Mandhana, Jemimah Rodrigues, and Renuka Singh are known for their depth and sensitivity. Beyond match reports, Priya writes regularly on media representation and the structural barriers women face in sports journalism. A recipient of the Ramnath Goenka Award and the Laadli Media Award, she believes that telling the full story of women’s cricket is not just a beat, but a responsibility.