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ईशान किशन की परिपक्व पारी: मुश्किल पिच पर अपनी बल्लेबाजी का खुलासा

Priya Sharma · · 1 min read

मुश्किल पिच पर ईशान किशन का मास्टरक्लास

आईपीएल के एक रोमांचक मुकाबले में जब सनराइजर्स हैदराबाद के सामने चेन्नई सुपर किंग्स द्वारा निर्धारित 180 रनों का लक्ष्य था, तो ईशान किशन को यह अच्छी तरह समझ आ गया था कि यह लक्ष्य आसान नहीं होगा। 20 ओवर तक विकेटकीपिंग करने के बाद, उन्होंने पिच के मिजाज को भांप लिया था। विशेष रूप से स्पिनरों और धीमी गति की गेंदों का सामना करना बल्लेबाजों के लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो रहा था।

मैच की स्थिति और किशन की रणनीति

ईशान किशन ने तीसरे ओवर में ही बल्लेबाजी की कमान संभाली और यह सुनिश्चित किया कि वे अंत तक क्रीज पर बने रहें। किशन ने 47 गेंदों में 70 रनों की महत्वपूर्ण पारी खेली। पोस्ट-मैच प्रेजेंटेशन के दौरान उन्होंने कहा, ‘जब मैं विकेटकीपिंग कर रहा था, तभी मुझे लगा कि यह पिच आसान नहीं है। मुझे लगा कि इस लक्ष्य का पीछा करना मुश्किल होगा क्योंकि धीमी गेंदें काफी असरदार साबित हो रही थीं।’

किशन ने आगे कहा, ‘एक नंबर तीन बल्लेबाज के तौर पर, मेरा काम खेल को फिनिश करना था। निचले क्रम के बल्लेबाजों के लिए अंत में आकर रन बनाना और बाउंड्री लगाना चुनौतीपूर्ण होता है, इसलिए मैंने फैसला किया कि मुझे आखिरी ओवर तक बल्लेबाजी करनी है।’

आक्रामकता और संयम का मेल

ईशान किशन ने 148.93 के स्ट्राइक रेट से बल्लेबाजी की। हालांकि, यह उनके इस सीजन के औसत स्ट्राइक रेट से कम था, लेकिन परिस्थिति की मांग को देखते हुए यह पारी अत्यंत महत्वपूर्ण थी। उन्होंने शुरुआत में स्पेंसर जॉनसन की गेंदों पर तीन चौके जड़कर लय हासिल की। जब मैच 18वें ओवर में निर्णायक मोड़ पर था, तब किशन ने मुकेश चौधरी की गेंदों पर एक चौका और एक छक्का लगाकर जीत को आसान बना दिया।

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किशन ने आत्म-विश्वास के महत्व पर जोर देते हुए कहा, ‘यह सब खुद पर विश्वास करने के बारे में है। कभी-कभी स्थितियां कठिन होती हैं, लेकिन आपको किसी भी मोड़ पर संदेह नहीं करना चाहिए। एक बाएं हाथ के बल्लेबाज के तौर पर, मध्य ओवरों में गेंदबाजों के लिए लाइन और लेंथ बनाए रखना मुश्किल होता है, और मैंने उसी का लाभ उठाया।’

हेनरिक क्लासेन का साथ

ईशान किशन और हेनरिक क्लासेन की जोड़ी ने पारी को नई दिशा दी। आठवें ओवर में जब ये दोनों साथ आए, तब टीम का स्कोर 56 रन पर दो विकेट था और आवश्यक रन रेट 10 से ऊपर पहुंच चुका था। क्लासेन ने शुरुआत में संभलकर खेलने की कोशिश की, लेकिन जल्द ही अपनी स्वाभाविक आक्रामक शैली में वापस लौट आए।

क्लासेन ने स्पिनरों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया और टीम को मिडिल ओवरों के दबाव से बाहर निकाला। क्लासेन ने पिच के बारे में बात करते हुए कहा, ‘पहले कुछ गेंदों को ब्लॉक करने के बाद मुझे लगा कि मैं इस तरह क्रिकेट नहीं खेल सकता। मुझे इस पिच पर आक्रामक होना ही होगा। पिच थोड़ी नीची रह रही थी, जो इसे चुनौतीपूर्ण बनाती है, लेकिन यह चेन्नई की बेहतर पिचों में से एक थी।’

निष्कर्ष

ईशान किशन की परिपक्वता और हेनरिक क्लासेन की विस्फोटक बल्लेबाजी का मिश्रण ही सनराइजर्स हैदराबाद की जीत का मुख्य कारण बना। कठिन परिस्थितियों में भी अपनी तकनीक पर भरोसा रखना और परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना, एक सफल बल्लेबाज की निशानी है। यह मैच क्रिकेट प्रेमियों के लिए एक सबक की तरह है कि कैसे धैर्य और सही शॉट चयन से किसी भी मुश्किल लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

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मुख्य बिंदु:

  • ईशान किशन ने 47 गेंदों में 70 रनों की संयमित पारी खेली।
  • पिच धीमी थी और स्पिनरों के लिए मददगार साबित हो रही थी।
  • अंत तक क्रीज पर बने रहने की रणनीति ने टीम को जीत दिलाई।
  • हेनरिक क्लासेन ने अपनी आक्रामकता से दबाव को कम किया।
Written by Priya Sharma

Priya Sharma is a senior cricket correspondent for The Indian Express, and one of the most respected voices covering women’s cricket in India. A graduate of Miranda House, she started her career in a newsroom dominated by men’s sport and deliberately chose to put women’s cricket at the centre of her reporting. Priya has chronicled the Indian women’s team through World Cups, the transformational arrival of the Women’s Premier League, and the quiet, determined rise of girls’ cricket in small towns and villages. Her long‑form profiles of cricketers like Smriti Mandhana, Jemimah Rodrigues, and Renuka Singh are known for their depth and sensitivity. Beyond match reports, Priya writes regularly on media representation and the structural barriers women face in sports journalism. A recipient of the Ramnath Goenka Award and the Laadli Media Award, she believes that telling the full story of women’s cricket is not just a beat, but a responsibility.