Sanjay Manjrekar attacks Ajit Agarkar and BCCI over Yashasvi Jaiswal’s exclusion – संजय मांजरेकर ने यशस्वी जायसवाल को बाहर करने पर बीसीसीआई और अजीत अगरकर पर साधा निशाना
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भारतीय चयन पर उठे सवाल: क्या यशस्वी जायसवाल को न्याय मिला?
हाल ही में घोषित भारतीय वनडे टीम ने क्रिकेट जगत में कई चर्चाओं को जन्म दिया है। अफगानिस्तान के खिलाफ 14 जून से शुरू होने वाली तीन मैचों की सीरीज के लिए भारतीय चयनकर्ताओं द्वारा चुनी गई टीम पर पूर्व क्रिकेटर और विशेषज्ञ संजय मांजरेकर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मांजरेकर का मानना है कि युवा प्रतिभाशाली खिलाड़ियों, विशेषकर यशस्वी जायसवाल को टीम से बाहर करना एक अनुचित निर्णय है और चयनकर्ताओं को इसके लिए उनसे माफी मांगनी चाहिए।
अजीत अगरकर और चयन समिति के फैसलों पर असंतोष
अजीत अगरकर के नेतृत्व वाली चयन समिति ने इस टीम में कई हैरान करने वाले बदलाव किए हैं। जहाँ ईशान किशन की टीम में वापसी हुई है, वहीं यशस्वी जायसवाल और ऋषभ पंत जैसे खिलाड़ियों को बाहर का रास्ता दिखाया गया है। मांजरेकर ने स्पष्ट रूप से कहा कि चयन समिति की दृष्टि और भविष्य की योजना स्पष्ट नहीं है। उन्होंने अनुभवी खिलाड़ियों को प्राथमिकता देने की आलोचना की, विशेषकर तब जब उनकी फिटनेस और फॉर्म दोनों पर सवालिया निशान लगे हों।
यशस्वी जायसवाल का शानदार रिकॉर्ड और अनदेखी
संजय मांजरेकर ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि यशस्वी जायसवाल ने अपनी काबिलियत साबित की है। जायसवाल ने अपने पिछले वनडे मैच में नाबाद 116 रन की पारी खेली थी और उनका औसत 57 का है। मांजरेकर के अनुसार, ‘एक युवा खिलाड़ी जिसने कठिन परिस्थितियों में शानदार प्रदर्शन किया है, उसे बाहर करना समझ से परे है। चयनकर्ताओं को उन्हें फोन करके माफी मांगनी चाहिए।’ उन्होंने साई सुदर्शन का भी जिक्र किया, जिन्होंने शीर्ष क्रम पर लगातार अर्धशतक जड़े हैं, फिर भी उन्हें नजरअंदाज किया गया है।
रोहित और कोहली की भूमिका पर बहस
मांजरेकर का मानना है कि भारतीय टीम के पास शुभमन गिल, साई सुदर्शन और यशस्वी जायसवाल के रूप में एक बेहतरीन शीर्ष क्रम तैयार है। हालांकि, चयनकर्ता अभी भी रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे अनुभवी खिलाड़ियों पर निर्भर हैं। मांजरेकर ने कहा कि हालांकि कोहली के मामले में कुछ तर्क दिया जा सकता है, लेकिन रोहित शर्मा की फिटनेस और फॉर्म को देखते हुए उन्हें टीम में रखना एक बड़ा समझौता है। उन्होंने कहा, ‘अगर चयनकर्ताओं को लगता है कि यह भारतीय क्रिकेट का भविष्य है, तो वे गलत हैं। गिल, किशन, सुदर्शन और गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी भी वही परिणाम दे सकते हैं जो दिग्गज दे रहे हैं। बस उन्हें निरंतर अवसर देने की आवश्यकता है।’
भविष्य की ओर देखने का समय
मांजरेकर ने अपनी बात को और स्पष्ट करते हुए कहा कि चयन समिति को यह सोचने की जरूरत है कि भारतीय क्रिकेट का भविष्य क्या है। उम्रदराज खिलाड़ियों पर अत्यधिक निर्भरता भविष्य के लिए सही नहीं है। उन्होंने कहा कि समय आ गया है कि युवा प्रतिभाओं पर भरोसा किया जाए और उन्हें अपनी क्षमता दिखाने के लिए कम से कम 10 मैचों की श्रृंखला का मौका दिया जाए। यशस्वी जायसवाल का वनडे करियर अभी शुरू ही हुआ था और उन्हें इस तरह से बाहर करना उनके मनोबल पर असर डाल सकता है।
निष्कर्ष: एक कठिन फैसला या चूक?
अफगानिस्तान के खिलाफ टीम चयन ने एक बार फिर भारतीय क्रिकेट के चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और दूरदर्शिता की बहस को हवा दे दी है। क्या अनुभवी खिलाड़ियों का अनुभव युवा जोश पर भारी पड़ेगा या बीसीसीआई को भविष्य की खातिर सख्त फैसले लेने होंगे? मांजरेकर की नाराजगी केवल एक खिलाड़ी के बाहर होने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उस प्रणाली की ओर इशारा करती है जो प्रतिभा के बजाय पुराने नामों को अधिक महत्व दे रही है। क्रिकेट प्रशंसकों को अब यह देखना होगा कि क्या आने वाले मैचों में टीम का प्रदर्शन इन फैसलों को सही साबित करता है या फिर चयनकर्ताओं को अपनी नीति में बदलाव करने पर मजबूर होना पड़ेगा।