वैभव सूर्यवंशी को मिला सचिन तेंदुलकर जैसा दर्जा, MS धोनी के स्काउट ने की तुलना
वैभव सूर्यवंशी अब सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि भारतीय क्रिकेट के भविष्य की उम्मीद बन चुके हैं। सिर्फ 15 साल की उम्र में, इस युवा बल्लेबाज ने आईपीएल 2026 में ऐसा प्रदर्शन किया है जिसने न सिर्फ फैंस को हैरान किया है, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया है। अब तो उनकी तुलना सीधे क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर से की जा रही है — और ये तुलना किसी आम विश्लेषक ने नहीं, बल्कि वैसे व्यक्ति ने की है जिन्होंने खुद एमएस धोनी को भारतीय टीम में चुना था।
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किरण मोरे की भविष्यवाणी: एक नया सचिन आया है
पूर्व भारतीय विकेटकीपर और मुख्य चयनकर्ता किरण मोरे ने वैभव सूर्यवंशी को देखकर वो ही एहसास महसूस किया जो उन्होंने साल 1989 में 16 साल के सचिन तेंदुलकर के डेब्यू के दौरान महसूस किया था।
एएनआई को दिए एक बयान में मोरे ने कहा, “जब मैंने पहली बार सचिन तेंदुलकर को टीम में आते देखा, खासकर महान गेंदबाजों के खिलाफ बल्लेबाजी करते हुए, तो महसूस हुआ कि ये कोई साधारण खिलाड़ी नहीं है। वैभव सूर्यवंशी में भी वही कुछ खास है। ये लड़का खास है। देश के लिए गौरव लाएगा। भगवान ने इसे इस खेल के लिए बनाया है।”
आईपीएल 2026 में सूर्यवंशी का धमाल
राजस्थान रॉयल्स (आरआर) के लिए खेल रहे वैभव सूर्यवंशी ने इस सीजन 13 मैचों में 579 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और तीन अर्धशतक शामिल हैं। उनका स्ट्राइक रेट चौंकाने वाला 236.32 है।
यही नहीं, वे आईपीएल इतिहास में सबसे कम उम्र में एक से अधिक शतक लगाने वाले भारतीय और समग्र खिलाड़ी बन गए हैं। उन्होंने इस सीजन 53 छक्के लगाए हैं, जो किसी भी भारतीय द्वारा एक सीजन में सबसे ज्यादा है। वे क्रिस गेल के 59 छक्कों के रिकॉर्ड के काफी करीब हैं।
अंडर-19 और लिस्ट-ए में भी धाक जमाई
वैभव के आंकड़े सिर्फ आईपीएल तक सीमित नहीं हैं। लिस्ट-ए क्रिकेट में उन्होंने 8 पारियों में 333 रन बनाए हैं, जिसमें एक शतक और एक अर्धशतक शामिल है। उनका औसत 44.12 और स्ट्राइक रेट 164.95 है।
अंडर-19 वनडे में तो वे भारत के सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ी हैं — 25 पारियों में 1412 रन औसत 56.48 और स्ट्राइक रेट 165 के साथ, जिसमें चार शतक और सात अर्धशतक शामिल हैं।
भारत ए के लिए चयन: भविष्य की ओर पहला कदम
चीफ सिलेक्टर अजित अगरकर ने हाल ही में श्रीलंका में होने वाली त्रिकोणीय श्रृंखला के लिए भारत ए टीम में वैभव को जगह दी है। एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में, अगरकर ने स्पष्ट किया कि यशस्वी जैसवाल अभी भी शीर्ष पर हैं, लेकिन उनके आगे आने वाले युवा खिलाड़ी भी नजर रख रहे हैं।
वैभव का चयन न सिर्फ उनकी प्रतिभा की पुष्टि करता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि भारतीय क्रिकेट के पाइपलाइन में अब और भी प्रतिभाशाली नाम तैयार हो रहे हैं।
सचिन की तरह संघर्ष और जज्बा
सचिन तेंदुलकर ने अपने पहले टेस्ट दौरे में ही वाकर यूनिस के बाउंसर पर नाक टूटने के बावजूद बल्लेबाजी जारी रखी थी। वैभव अभी तक ऐसे परिदृश्य से नहीं गुजरे हैं, लेकिन उनके खेल में वही आत्मविश्वास, तकनीक और निडरता दिखती है जो एक महान बनने की पहली परीक्षा है।
वैभव सूर्यवंशी बिहार के हैं, और उनका उदय भारत के छोटे शहरों से आने वाली प्रतिभा के लिए एक प्रेरणा है।
सवाल अब ये नहीं कि क्या वे सफल होंगे, बल्कि ये है कि कहां तक पहुंचेंगे।