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अफगानिस्तान की निर्वासित महिला क्रिकेट टीम इंग्लैंड दौरे के लिए तैयार

Raj Thapa · · 1 min read

एक नई शुरुआत की ओर: अफगान महिला खिलाड़ियों का इंग्लैंड दौरा

अफगानिस्तान की निर्वासित महिला क्रिकेट खिलाड़ी एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार हैं। अगले महीने प्रस्तावित उनका इंग्लैंड दौरा खेल जगत में समावेशिता और अटूट साहस का एक शक्तिशाली संदेश लेकर आया है। यह दौरा न केवल उनके लिए प्रशिक्षण का अवसर है, बल्कि टी20 महिला विश्व कप के दौरान लॉर्ड्स के ऐतिहासिक मैदान पर उनकी भागीदारी भी सुनिश्चित करता है।

खेल से निर्वासन तक का कठिन सफर

इस पूरी कहानी की शुरुआत नवंबर 2020 में हुई थी, जब अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने काबुल में महिलाओं के लिए क्रिकेट ट्रायल आयोजित किए थे और 25 महिला खिलाड़ियों के साथ अनुबंध पर हस्ताक्षर किए थे। हालांकि, अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता में आने के बाद स्थिति पूरी तरह बदल गई। अफगानिस्तान में महिलाओं और लड़कियों के सार्वजनिक जीवन, विशेष रूप से खेलों में भाग लेने पर कड़े प्रतिबंध लगा दिए गए। इसके परिणामस्वरूप, ये खिलाड़ी अपना देश छोड़ने पर मजबूर हो गईं और आज उनमें से अधिकांश ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं।

निरंतरता और जुझारूपन

देश से दूर होने और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) से औपचारिक मान्यता न मिलने के बावजूद, इन खिलाड़ियों ने हार नहीं मानी है। उन्होंने ‘अफगानिस्तान रिफ्यूजी इलेवन’ के रूप में अपनी पहचान बनाई है और क्रिकेट विदाउट बॉर्डर्स जैसी टीमों के खिलाफ मुकाबले खेले हैं। 2025 की महिला एशेज के दौरान उनका प्रदर्शन और पिछले साल भारत में हुए 50-ओवर विश्व कप में उनकी उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कम नहीं हुआ है।

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दौरे का महत्व और सहयोग

यह महत्वपूर्ण दौरा 22 जून से शुरू होगा, जिसे इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड (ECB) द्वारा MCC, MCC फाउंडेशन और स्पोर्ट्स कंसल्टेंसी ‘इट्स गेम ऑन’ के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।

  • प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा: खिलाड़ी इस दौरे के दौरान न केवल उच्च स्तरीय प्रशिक्षण प्राप्त करेंगी, बल्कि कई टी20 मुकाबले भी खेलेंगी।
  • जागरूकता का प्रसार: यह दौरा उन खिलाड़ियों की दुर्दशा को दुनिया के सामने रखने का एक माध्यम है, जिन्होंने अपने अधिकारों के लिए भारी कीमत चुकाई है।
  • वैश्विक मंच: अंत में, ये खिलाड़ी लॉर्ड्स में टी20 महिला विश्व कप के फाइनल में शामिल होंगी, जो वैश्विक क्रिकेट समुदाय के साथ उनके जुड़ाव को फिर से जीवंत करेगा।

विशेषज्ञों की राय

पूर्व ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी और ‘इट्स गेम ऑन’ की संस्थापक मेल जोन्स ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा, “इन खिलाड़ियों ने सब कुछ खो देने के बावजूद खेल के प्रति जो साहस और प्रतिबद्धता दिखाई है, वह असाधारण है। उन्हें वैश्विक क्रिकेट समुदाय का हिस्सा माना जाना चाहिए। हालांकि यह दौरा एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन हमें भविष्य में निरंतर और सार्थक कार्रवाई की योजना की आवश्यकता है।”

ECB की उप-सीईओ और इंग्लैंड महिला क्रिकेट की प्रबंध निदेशक क्लेयर कॉनर ने भी इस भावना को दोहराते हुए कहा कि क्रिकेट की जिम्मेदारी है कि वह समावेशन और अवसर के पक्ष में खड़ा रहे। उन्होंने इन खिलाड़ियों के लचीलेपन की सराहना की और कहा कि इंग्लैंड को इस दौरे की मेजबानी करने पर गर्व है।

निष्कर्ष

अफगानिस्तान की इन महिला खिलाड़ियों का इंग्लैंड दौरा महज एक खेल कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उन सभी खिलाड़ियों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने सपनों को जीवित रखे हुए हैं। यह दौरा क्रिकेट जगत को याद दिलाता है कि खेल की असली शक्ति लोगों को जोड़ने और सीमाओं से परे जाकर समर्थन देने में निहित है। क्या यह यात्रा इन खिलाड़ियों को भविष्य में पूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिलाने में सहायक होगी? यह आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन फिलहाल, उनकी यह एकजुटता अपने आप में एक जीत है।

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Written by Raj Thapa

Raj Thapa is a senior sports journalist for The Himalayan Times, widely regarded as one of the most consistent chroniclers of Nepal’s cricket journey from obscurity to the ICC global stage. A Tribhuvan University graduate, he began covering school and university cricket in the Kathmandu Valley before witnessing firsthand the national team’s rise through the World Cricket League. Raj specialises in fast bowling analysis, a rare focus in a region dominated by spin, and has tracked Nepal’s emerging seam attack with technical precision. He has reported from ICC World Cup Qualifiers, multiple Everest Premier League seasons, and bilateral series across South Asia. His writing blends match‑day insight with long‑term narratives about the structures and sacrifices behind Associate Member sport. A recipient of the NSJF award and his newspaper’s top journalism honour, Raj remains a passionate advocate for youth cricket and a firm believer that Nepal’s best sporting stories are yet to be written.